Mr. Sonu Sharma is the founder of DYNAMIC INDIA GROUP (INDIA). An Author, Educator, Business Consultant and a successful Entrepreneur, he is a much sought-after speaker.

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नेटवर्क मार्केटिंग

नेटवर्क मार्केटिंग “Why do people fail?” लोगों के काम करने के तरीके में उनकी असफलता का सारा राज छिपा है। अगर आप गौर से उनके काम करने का तरीका देखें तो वह तरीका ही बता देगा कि वे फेल होने वाला ही काम कर रहे हैं। उनके काम करने के तरीके में ही उनकी असफलता का राज छिपा है, समझाता हूँ कैसे। आप बिजनेस से जुड़े है। जानते हैं पहला काम आपको क्या करना है? बिना लिस्ट बनाए लोगों को कॉल करना चालू कर दीजिये - ‘हैलो! नमस्कार, कैसे हैं आप?’ आपने अभी लिस्ट नहीं बनाई और काम करते ही, जुड़ते ही अभी पैसा दिया है। आपने अभी-अभी पहली सीढ़ी उतरी है और पहले व्यक्ति को फोन लगा कर पूछा है- ‘एक काम है, करेगा तू? मैंने एक काम किया है, क्या तू भी करेगा?’ अभी इसे पता ही नहीं है कि करना क्या है? लेकिन इसे लगता है कि इसे पता है कि क्या करना है। ध्यान दीजिए! लोगों के काम करने के तरीके में ही असफलता का राज छिपा है। आप लोगों को गौर से देखिए। लोगों के फेल होने के कारण इसलिए बता रहा हूँ कि आप जल्दी समझ जाएँ। मान लीजिये आपने किसी गेस्ट को कॉल किया और आपका सीनियर आपके गेस्ट को प्रजेन्टेशन दिखा रहा है। मान लेते हैं कि उनका नाम है मनोज कुमार। मेरे सीनियर मेरे साथ हैं जिनका नाम है प्रदीप कुमार है और मनोज जी मेरे गेस्ट हैं। मैं बिजनेस से जुड़ा, जुड़ने के बाद मनोज कुमार जी को प्रदीप कुमार जी के पास ले आया। अब जो भी काम था इन्होंने किया। प्रदीप जी ने इनको प्लान समझाने और डेमोनेस्ट्रेशन दिखाने चालू कर दिए। लोगों के फेल होने में उनके काम करने के तरीके का बहुत बड़ा रोल है। गौर से देखिए हो क्या रहा है बाजार में। आप छोटी-छोटी बातें नजरअंदाज करते हैं। छोटा सा छेद पानी के जहाज को डुबो देता है, छोटी सी चिनगारी जंगल की आग में बदल कर पूरे जंगल को राख कर सकती है; मूलतः छोटी-छोटी गलतियाँ बहुत बड़ा नुकसान कर देती हैं। टाइटैनिक में छोटी सी गलती की वजह से पन्द्रह सौ लोग डूब गए थे। अब जो दिखाना है उसके लिए चलिए ऐसा मान लेते हैं कि मैं बैठा हुआ हूँ और आप गेस्ट को प्लान दिखा रहे हैं, नॉर्मल डिस्कशन कर रहे हैं। इनका प्लान चालू है, एक इनके गेस्ट हैं और मैं हूँ होस्ट। यहाँ पर जब आप क्लाइंट से बात कर रहे हों तो आपको यह ध्यान रखना है कि आप उसे बार-बार यही दिखाएँ कि आपका काम कितना व्यस्त रखता है आपको और आपके पास क्लाइंटों की लाइन लगी पड़ी है। जैसे, ‘हाँ आज तो आया हूँ किसी काम से... प्लान चल रहा है इनका... बढ़िया... तू बता...।‘ ‘अच्छा! आ रहा हूँ सर, आ रहा हूँ... ठीक है... फिर देखते हैं क्या है।’ ध्यान दीजिये, एक्टिविटी देखिये मेरी। गौर करिए। फिर बैठ गया। ‘सर थोड़ा जल्दी बताओ... हमें जाना है...।’ आप ध्यान दीजिये मैं कैसे अपने सीनियर का हाल बेहाल कर रहा हूँ। गौर कीजिए, लोगों के काम करने के तरीके में उनकी असफलता का राज छिपा हुआ है। होस्ट जब वहाँ पर मौजूद है तो वो होस्ट वहाँ पर क्या कर रहा है। वो सेमिनार के बजाए सम कर रहा है। सेमिनार पर फोकस करने के बजाए सब एक्टिविटी कर रहा है; फेसबुक भी देख रहा है, व्हाट्सअप भी देख रहा है और कॉल भी अटेंड कर रहा है, इधर-उधर मुँह भी मार रहा है। वह अपने सारे काम कर रहा है। ऐसे में गेस्ट के दिमाग में एक ही बात डायरेक्टली जाती है कि यह सीरियस नहीं है। अब आप बोलेंगे कि ‘हम तो सीरियस हैं।’ लेकिन तुम्हारी एक्टिविटी बता रही है तुम नॉन-सीरियस हो। आप ध्यान से देखिए कि लोगों की असफलता बताएगी कि वो कौन-कौन सी हरकतें रोज करते हैं। अब ये छोटी-छोटी सी बातें हैं पर आप गौर नही फरमा रहे हैं। जो होस्ट गेस्ट को लेकर आया हो उसका रोल बिल्कुल अलग है। उसका बड़ा सिम्पल रोल है कि जब वह होस्ट और अपने सीनियर के साथ अपने गेस्ट को बिठा दे तो फोन को बंद कर के साइड में रख दे और सीनियर की बात सुने। आप प्लान दिखा रहे हैं और मैं बिल्कुल ध्यान से देख रहा हूँ, जैसे मैं पहली बार देख रहा हूँ। मेरा भी रोल है उस वक्त। खाली सीनियर का रोल नहीं। मैं सीनियर को ऐसे सुन रहा हूँ - ध्यान से - जैसे मैं पहली दफा सुन रहा हूँ। और जहाँ मुमकिन हो वहाँ नोट्स भी बना रहा हूँ, कोई फोन नहीं है। और अगर गलती से मेरे गेस्ट का फोन बज गया उसको कहें कि वह भी बाद में बात कर लें। मैं बहुत ध्यान से एक घंटा सुन रहा हूँ और बिल्कुल भी टोका-टाकी नहीं कर रहा हूँ। सीनियर को जवाब देने का मौका दिए बिना काम कर रहा हूँ। अगर आप कामयाब लोगों से नेटवर्क मार्केटिंग के बारे में बात करेंगे तो वो आपको बताएंगे कि लोगों के फेल होने का कारण उन्हीं की एक्टिविटी में छिपा है। आपका सीनियर जब आपके गेस्ट को बिजनेस प्रेजेंट कर रहा है तो आपका भी एक रोल है, पार्टीसिपेशन है, और आपका पार्टीसिपेशन ये है; जब मैं पाँच बार, दस बार, पन्द्रह बार प्लान देते हुए सुनूँगा, एक्सेप्ट करूँगा तो मुझे भी समझ में आएगा कि मुझे काम कैसे करना है। कल को ये सवाल पूछेगा और ये आन्सर देंगे, तो मुझे पता चलेगा कि ये सवाल पूछने पर ये आन्सर देना है। लेकिन अगर मैं फोन में ही व्यस्त हूँ तो मुझे समझ ही क्या आएगा कि क्या कन्वर्सेशन हुआ। ये जुड़ भी गया, मैंने पैसे कमा भी लिये, पर सीखा क्या? जिन्दगी भर अपाहिज बनकर अपने सीनियर के आगे-पीछे घूमता रहूँगा कि ‘बाबूजी समझा दो’। छः महीने के बाद भी आपको प्लान दिखाना नहीं आया। आप में भी होंगे ऐसे बहुत से कलाकार। एक साल के बाद भी सीनियर को बोलते हैं, ‘मेरे दो गेस्ट हैं, प्लान दिखा दोगे आप?’ अगर अपने सीनियर को दस बार प्लान देते हुए सुनते, दो-चार बार नुकसान उठाते, पर दस बार के बाद शायद सीनियर की जरूरत ही नही पड़ती। प्रॉब्लम को प्रॉब्लम की तरह देखिये, सारा का सारा दारोमदार उस आदमी का होता है जो गेस्ट लाया है। कम्पनी सबके लिए बराबर है। प्रोड्क्टस सबके लिए बराबर हैं। सीनियर सबके लिए बराबर है। जो फेल हो रहा है उसके लिए वह खुद जिम्मेदार है और कोई नहीं। उसकी एक्टिविटी गड़बड़ है। वह कभी-कभी गेस्ट को सेमिनार में लेकर आता है। अब सेमिनार क्या? बैठा तो है गेस्ट, अब जब सेमिनार में प्लान चल रहा है ना, तो बीच-बीच में कुछ और भी बात कर रहा है उससे- ...‘‘आज चलेंगे फिल्म देखने... और फिर बैठना भी है। ये खत्म हो जाए तो अब चलते हैं।’’ याद रखिये, जितनी देर आप गेस्ट के साथ रहो, धंधे के अलावा कोई और बात ना करना। अगर वह कहीं और डाईवर्ट हो भी गया है बातों में, तो उसे पकड़ कर वापस ले आना धंधे में। लीडरशिप होना बहुत बड़ी बात है। वो कह रहा है कि ‘‘कल ऐक्सीडेंट हो गया था।’’ लेकिन यह सही है कि ये जबरदस्त ऐक्सीडेंट है जिन्दगी का जो हमारे साथ तीन दिन पहले हुआ। और वह है एमएलएम! वो कोई भी टॉपिक छेड़ रहा है आप घुमा कर उसको वापस धंधे में लेकर आओ। तुम्हारा उल्टा है। वो कह रहा है कि ‘‘आज मौसम बहुत बढ़िया है...’’ तो तुम तो इंतजार में ही हो कि ‘आज शाम को खोलेंगे, भाई’। उसके लिए तो यह बिजनेस एक्सपेरीमेंट के तौर पर हो रहा है। चला तो चला, ना चला तो कौन सी जायदाद ले गया। 15 लगे, सूट ले आए, भाड़ में जाए कम्पनी, फिर बाद में लोग बोलते हैं कि हम फेल हो गये। कौन कारण है? यू आर फ्लॉप। इसका बुनियादी कारण मैं आपको समझाने की कोशिश करता हूँ। लोग ट्रेनिंग में आ रहे हैं, पैसे खर्च कर रहे हैं, अपना आज इन्वेस्ट कर रहे हैं, मगर वो सीरियस नहीं हैं। आप बोलेंगे कि ‘‘हम तो बहुत सीरियस हैं।’’ सुनना, समझना, आत्मसात करना और इम्पलीमेंट करना ये चारों अलग-अलग बातें हैं। मैं जब इस बिजनेस में आया तो सिखाने वाला कोई नहीं था, मैं अकेला था। बहुत छोटी सी कम्पनी थी, लोग मुझसे पूछते हैं कि मैंने कैसे कर लिया। अभी भी पूछते हैं कि मेरी पहली साल की इन्कम एक करोड़ रुपये कैसे थी। जी हाँ! मेरे पहले साल का सर्टीफिकेट, साल 2006-2007 का 1 करोड़ 2 लाख रुपये था। पहले 6 महीने की इनकम, 15 लाख रुपये थी, चाथे महीने में लिमिट में थी। ये तब जब नेटवर्क मार्किटिंग के बारे में कुछ किसी को पता ही नहीं था, इतनी नकारात्मकता थी, कम्पनी छोटी थी। लोग कहते थे - ‘‘चलेगी नहीं, तुम भाग जाओगे।’’ ये सब फालतू फंड की ड्रामेबाजी चलती थी। इन सब के बावजूद मुझे एक साल में 1 करोड़ मिला। लोग आज तक हैरत में हैं कि ‘तुमने कैसे कर लिया, तुम्हें क्या आता था?’ मैंने बोला, ‘‘कुछ नहीं आता था इसलिए कर लिया, आता होता तो कर नहीं पाते।’’ लेकिन सच में स्टूडेंट की तरह इस बिजनेस को समझा, और स्टूडेंट की तरह इस बिजनेस में काम किया। इस बिजनेस में बहुत पैसा है अगर तुम सीरियसली इस बिजनेस में काम करो। लेकिन अगर हँसी मजाक करोगे, मसखरी करोगे, तो ये तुमको चार दिन में उड़ा देगा। जिन्दगी देती नहीं, लौटाती है। मैंने पहले भी कहा था, जो दोगे, पलट के, लौटा के सूद समेत वापिस करेगा। मैं आपके सामने जीता जागता उदाहरण हूँ जो इसी मेसेज को दे रहा हूँ, इसी धरती पर काम कर रहा हूँ, इसी दिल्ली में कर रहा हूँ। मेरा यही कहना है कि सिर्फ सुनो मत, अमल करो।