Mr. Sonu Sharma is the founder of DYNAMIC INDIA GROUP (INDIA). An Author, Educator, Business Consultant and a successful Entrepreneur, he is a much sought-after speaker.

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खुश रहिये

हम सब जानते हैं कि पैसे से ख़ुशी नहीं खरीदी जा सकती...मगर अक्सर हम ऐसे बर्ताव करते हैं कि अगर हमारे पास थोडा और पैसा होता तो हम ज्यादा खुश होते| अमीर बनने की चाह हमारे अन्दर पैदा की जाती है (जबकि हम जानते हैं कि अमीर भी खुश नहीं हैं)... हमे ट्रेन किया जाता है उस आधुनिक गैजेट को पाने की चाह रखने के लिए या टीवी पर दिखाए उस नए स्टाइल को अपनाने के लिए... हम ज्यादा कमाना चाहते हैं ताकि हम एक बेहतर ज़िन्दगी जी सकें| मगर इस सब से हमे ख़ुशी नहीं मिल सकती| चाहे हम जितना कमा लें| चाहे हमारे बैंक में कितने ही पैसे आ जाएँ| चाहे हमारे कपड़े, कार या खिलौने कितने ही अच्छे हो जाएँ, ये सब हमे ख़ुशी नहीं दे सकते| मगर दुखद है कि इस बात की समझ आने से पहले हम कई दशक पैसा और शान-ओ-शौकत कमाने में लगा चुके होंगे| तो हमे ख़ुशी कैसे मिलेगी? किस्मत अच्छी है कि इसके लिए जिन तीन चीज़ों की ज़रूरत है उनमे कोई खर्चा नहीं है| रिसर्च के अनुसार ये तीन चीज़ें स्थापित हुई हैं – सैंकड़ों लोगों से पूछने के बाद की उनके पास क्या है, उनकी जिंदगियां कैसी हैं, और वो कितने खुश हैं| तो ये हैं, “खुश रहने के तीन राज़”: • अच्छे रिश्ते: इंसानी तौर पर दूसरों के पास रहना हम सब की ज़रूरत है, नज़दीकी, दुसरे इंसानों से| अच्छे, मददगार दोस्त, एक सशक्त शादी और अपने घरवालों के साथ करीबी, प्यारभरे सम्बन्ध हमे खुश रहने के ज़्यादा करीब लाते हैं| कदम बढ़ाएं: आज ही, वक्त निकालें, अपनों के साथ बिताने के लिए, उन्हें बताने के लिए की वे आपके लिए क्या हैं, उनकी सुनने के लिए, और उनके साथ अपना रिश्ता मज़बूत करने के लिए| सकारात्मक सोच: मैं निश्चित ही सकारात्मक सोच का अपने लक्ष्य को पाने का बेहतरीन तरीका मानने का बड़ा प्रवक्ता हूँ, मगर यह ख़ुशी पाने का भी एक बेहतरीन तरीका है| आशावाद और आत्मसम्मान खुश रहने वाले लोगों के सबसे बड़े सूचक हैं| ख़ुश लोग सशक्त और अपनी ज़िन्दगी की भागदौड़ बेहतर संभाले हुए होते हैं और ज़िन्दगी की ओर उनका एक आशावादी दृष्टिकोण होता है| कदम बढ़ाएं: सकारात्मक सोच को आदत बनाएं| बल्कि इसे अपनी सबसे पहली आदत बनाएं| हर बुरे ख्याल को दबा कर उसे अच्छे ख्याल से बदल देने की आदत डालें| “मुझसे नहीं होगा” की जगह “मुझसे होगा” सोचें| सुनने में यह शायद थोड़ा बड़बोला लगे, मगर मेरे लिए यह हर बार काम करता है| बहाव: यह आजकल इंटरनेट पर एक चलन है – वह स्थिति जिसमे हम प्रवेश करते हैं जब हम किसी काम में पूरी तरह से डूबे होते हैं| हम अपने काम में इतना डूबे होते हैं की हमे समय का पता ही नहीं चलता| काम या आराम जो भी हमे इस बहाव की स्थिति में ले आए, हमे निश्चित ही ख़ुशी देगा| लोगों को तब सबसे ज्यादा ख़ुशी नहीं मिलती जब वे खाली दिमाग होते हैं, बल्कि तब होती है जब उनके पास दिमाग लगाने लायक कोई चुनौती होती है| कदम बढ़ाएं: ऐसे काम ढूंढें जिनके लिए आपमें जोश हो| यह सबसे ज़रूरी कदम है| ऐसे शौक ढूंढें जिनके लिए आपके मन में उत्साह हो| टीवी बंद करें – या बहाव के उलटे जाना है – बाहर निकलें और कुछ ऐसा करें जिसमे आप सचमुच हिस्सेदार हों| आपको खुश रहने के तीन राज़ बताये गए हैं| इन्हें ज़ाया ना करें! इनका अनुसरण करें और प्रेरित रहें...