Mr. Sonu Sharma is the founder of DYNAMIC INDIA GROUP (INDIA). An Author, Educator, Business Consultant and a successful Entrepreneur, he is a much sought-after speaker.

Keep conected

About Sonu Sharma

Mr. Sonu Sharma is the founder of DYNAMIC INDIA GROUP (INDIA) An Author, Educator, Business Consultant and a successful Entrepreneur, he is a much sought-after speaker. Today he is one of the Youngest Inspirational Speaker in India He inspires and encourages individuals to realize their true potential. He has taken his dynamic personal messages to opposite sides of the globe. His 17 years of research & understanding in Direct Sales Industry has put many organizations on a path of growth and fulfillment.

PERSONAL DEVELOPMENT IS THE KEY TO SUCCESS

Income will not far exceed your Personal Development. Sometimes it take a lucky jump , If you do not work on your personal Development it will come back as you are.. Life has strange ways..The major question to ask on a job is not what are you getting , the major question to ask on a job is what are you becoming,True happiness is not contain in what you got, Happiness is contain in what you become, Success is looking for a good place to stay,Value makes the difference in Results,You can’t create more time but can create more value,1st lesson of Economics: We Primarily paid for Value we don’t get paid for the time.

  • Nothing is Impossible
  • Life Transformation # Part 1
  • शून्य से शिखर की ओर !| By Sonu Sharma
  • How to Sell Anything !

Our Esteemed Partner

Naswiz Retails Pvt. Ltd. - We are a group of individuals having a cumulative experience of decades in IT industry and in Direct selling. Our software expertise is strength of our business. The team have developed software solutions for many corporate, government and semi government customers. We are serving lot of International customers also. Our core telecom solution is being vastly utilised globally wherein we have fortune 500 companies, international banks and various government entities as our customers.

Naswiz prides itself in having a strong IT background. Along with the IT expertise, we are continuously working towards bringing amazing products at very reasonable prices. We adopted model of Direct selling to save various marketing costs that are added to the product and ultimately makes the product more expensive. Lot of money goes towards advertisements, distributor and dealer commissions, logistics etc. Direct selling saves much of this. In Direct Selling, this saved amount is shared with direct sellers in a defined manner. We are procuring products directly from manufacturers, having our own quality control mechanism and we provide a platform to individuals who want to work as entrepreneurs.

MONTAGE

Glimpse of Life Transformation

72.2M

Views

1M+

Subscribers

212,34,21,092

Minutes Views

196

Countries
Featured Services

We are devoted to excellence and developing global leaders. And our global leadership is expanding with over 2 lac Live Audience , creating a hub for Leadership and research in India and new programming to strengthen India’s Corporate sector. Additionally, By attending our Executive Education programs, you and your team will have access to industry leaders, and a global network of top professionals. Attendees of our programs include senior-level executives in a range of industries and functions.

 
 

Upcoming Events


OUR BLOG

  • एक बार नारायण; जिन्हें हम भगवान विष्णु भी कहते हैं; ने सोचा कि वो…

    एक बार नारायण; जिन्हें हम भगवान विष्णु भी कहते हैं; ने सोचा कि वो अपने इष्ट देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने के लिए उन्हें एक हजार कमल के पुष्प अर्पित करेंगे. पूजा की सारी सामग्री एकत्रित करने के बाद उन्होंने अपना आसान ग्रहण किया. और आँखे बंद कर के संकल्प को दोहराया. और अनुष्ठान शुरू किया. यथार्थ में शिव जी के इष्ट नारायण है, और नारायण के इष्ट शिव जी है. किन्तु आज इस क्षण भगवान शंकर भगवान की भूमिका में थे और भगवान नारायण भक्त की. भगवान शिव शंकर को एक ठिठोली सूझी. उन्होंने चुपचाप सहस्त्र कमलो में से एक कमल चुरा लिया. नारायण अपने इष्ट की भक्ति में लीन थे. उन्हें इस बारे कुछ भी पता न चला. जब नौ सौ निन्यानवे कमल चढ़ाने के बाद नारायण ने एक हजारवें कमल को चढ़ाने के लिए थाल में हाथ डाला तो देखा कमल का फूल नहीं था. कमल पुष्प लाने के लिए न तो वे स्वयं उठ कर जा सकते थे न किसी को बोलकर मंगवा सकते थे. क्यों की शास्त्र मर्यादा है की भगवान की पूजा अथवा कोई अनुष्ठान करते समय न तो बीच में से उठा जा सकता है न ही किसी से बात की जा सकती है. वो चाहते तो अपनी माया से कमल के पुष्पों का ढेर थाल में प्रकट कर लेते किन्तु इस समय वो भगवान नहीं बल्कि अपने इष्ट के भक्त के रूप में थे. अतः वो अपनी शक्तियों का उपयोग अपनी भक्ति में नहीं करना चाहते थे. नारायण ने सोचा लोग मुझे कमल नयन बोलते है. और तब नारायण ने अपनी एक आँख शरीर से निकालकार शिव जी को कमल पुष्प की तरह अर्पित कर दी. और अपना अनुष्ठान पूरा किया. नारायण का इतना समर्पण देखकर शिव जी बहुत प्रसन्न हुए, उनके नेत्रों से प्रेमाश्रु निकल पड़े . इतना ही नहीं, नारायण के इस त्याग से शिव जी मन से ही नहीं बल्कि शरीर से भी पिघल गए. और चक्र रूप में परिणित हो गए. ये वही चक्र है जो नारायण हमेशा धारण किये रहते है. तब से नारायण वही चक्र अपने दाहिने हाथ की तर्जनी में धारण करते है. और इस तरह नारायण और शिव हमेशा एक दूसरे के साथ रहते है. .

  • आपने movies में कोई ऐसा scene ज़रूर देखा होगा जिसमे hero jail से भागने…

    आपने movies में कोई ऐसा scene ज़रूर देखा होगा जिसमे hero jail से भागने के लिए एक सुरंग बनाता है और finally उस जेल से फरार हो जाता है. काफी exciting होता है ये, नहीं! पर आज मैं आपको खुद यही काम करने के लिए कह रहा हूँ …मैं आपको एक सुरंग बनाने के लिए कह रहा हूँ..क्योकि आप भी अपनी life के hero हैं और unfortunately एक virtual jail में क़ैद हैं …एक ऐसी जेल जिसमे जाने से पहले आपको पता भी नहीं था की वो एक जेल है….. आप किसी ऐसी job, business या काम में फंस चुके हैं जो आपको बिलकुल पसंद नहीं है …कभी कभी तो आप frustrated feel करते हैं …क्योंकि आप यहाँ वो नहीं कर रहे होते जो आप सबसे अच्छे ढंग से कर सकते हैं…आप खुद इसे छोड़ना भी चाहते हैं लेकिन financial obligations की वजह से छोड़ नहीं पाते.. मत accept करिए इस condition को, अपनी सुरंग बनाना शुरू करिए …अपने दिल का काम शुरू करिए …अगर नहीं पता कि वो क्या है तो उसे तलाशिये ….पर उस काम को ज़िन्दगी भर मत करिए जिसे आप पसंद नहीं करते …. जो आपको mediocre बनाता है. इस बात को हमेशा याद रखिये कि – जिस चीज को आप चाहते हैं उसमे असफल होना जिस चीज को आप नहीं चाहते उसमे सफल होने से बेहतर है. कैसे बनाएं सुरंग ? कैसे से ज्यादा ज़रूरी है की क्यों बनाएं … जेल में बहुत से कैदी होते हैं पर हीरो ही सुरंग क्यों बना पाता है, क्योंकि उसके सामने एक motive होता है, ये motive ही उसे इतना कठिन काम करने की inspiration देता है …आपका motive क्या है ??…क्या already आपके दिमाग में वो चीज है जो आप current job/ work को छोड़ कर करना चाहते हैं ? …अगर नहीं है तो इस बारे में सोचना बेकार है, ऐसे में अगर आप सुरंग बनाने में कामयाब हो भी जाते हैं तो पता है वो कहाँ निकलेगी ??? एक दूसरी जेल में!! तो अगर आपको लगता है कि आप किसी जेल में बंद हैं तो सबसे पहले आपको जानना होगा कि यहाँ से निकल कर आप करना क्या चाहते हैं, what is that excites you, किस चीज को लेकर आप passionate हैं? ये कैसे पता करें ? I really don’t know. पर मैंने कैसे किया ये आपको बता सकता हूँ. ACT करके. Friends, most of us कभी न कभी किसी चीज को लेकर excited होते हैं …सपने बुनने लगते हैं …आपने लोगों को कहते सुना या खुद भी कहा होगा, “ मैं एक restaurant शुरू करने वाला हूँ ”, “ मैं एक xyz company डालने वाला हूँ …”, etc..but most of the people just talk, they don’t act. अगर आपको अपना passion जानना है तो ACT करना.

  • सक्सेस पानी है तो तोड़िए कम्फर्ट जोन की जंजीरें!

    सक्सेस पानी है तो तोड़िए कम्फर्ट जोन की जंजीरें! एक कप चाय, मौसम के अनुरूप गर्म या ठंडा कमरा, आरामदेह बिस्तर और कानों में धीमा संगीत। क्या इससे बेहतर जिन्दगी हो सकती है। यकीनन आप का उत्तर होगा, “नहीं”। अब एक मिनट ठहरिये और सोचिये… अगर हेमशा ऐसा ही रहे तो क्या इससे बद्तर जिंदगी हो सकती है। यकीनन इस बार भी आप का उत्तर होगा, “नहीं” । थोड़ी देर के लिए तो यह सब अच्छा लगता है। पर अगर ऐसे ही रहना पड़े तो यह बहुत दर्दनाक है। क्यों है ना ? हाँ, क्योंकि इस जिंदगी में कोई विकास नहीं है, कोई संभावना नहीं है, कोई ऐडवेंचर नहीं है। याद है जब हम लोग बचपन में अपने मम्मी – पापा की अँगुली पकड़ कर मेला देखने जाते थे तो रोलर कोस्टर में चढने में बहुत मजा आता था। कभी ऊपर, बहुत ऊपर तो कभी नीचे बहुत नीचे। वो मजा जमीन पर एकसमान चलने में कहाँ। पर बड़े होते ही हम अपने को कटघरे में बंद करना शुरू कर देते हैं- हमसे ये नहीं हो सकता, हमसे वो नहीं हो सकता। फिर मोनोटोनस जिन्दगी से ऊब कर खामखाँ में ईश्वर को दोष देते रहते हैं। उसने पड़ोसी को सब कुछ दिया है पर हमारे भाग्य में… ? आपने ये कहावत सुनी होगी, “ऊपर वाला जब भी देता है छप्पर फाड़ कर देता है। ” लेकिन जरा सोचिये कि अगर आप का छप्पर ही छोटा हो तो बेचारे ईश्वर भी क्या कर पायेंगे। यहाँ छप्पर से मेरा तात्पर्य झोपड़ी या महल की छत से नहीं है बल्कि सोच से है। कहने का तात्पर्य यह है कि अगर आप छोटा सोचते हैं या किसी भी बदलाव से इंकार करते हैं तो आप जीवन में तरक्की नहीं कर पायेंगे। कहा भी गया है कि “change is the only constant.. केवल परिवर्तन ही अपरिवर्तनशील है “। फिर भी कई लोग बातें तो बड़ी -बड़ी करेंगें पर अपने जीवन में परिवर्तन जरा सा भी स्वीकार नहीं करेंगे। ऐसे लोग नयी परिस्तिथियों को स्वीकार न कर पाने की वजह से आने वाले हर मौके को गँवा देते हैं। फिर निराशा और अवसाद से घिर जाते हैं। कभी सोचा है, क्यों होता हैं ऐसा ? इसके पीछे बस एक ही कारण है उनका कम्फर्ट जोन .

  • रिक्शेवाले का बेटा बना IAS officer !

    अगर career के point of view से देखा जाए तो India में थ्री आइज़ (3 Is) का कोई मुकाबला नही: IIT,IIM, और IAS. लेकिन इन तीनो में IAS का रुतबा सबसे अधिक है । हर साल लाखों परीक्षार्थी IAS officer बनने की चाह में Civil Services के exam में बैठते हैं पर इनमे से 0.025 percent से भी कम लोग IAS officer बन पाते हैं । आप आसानी से अंदाज़ा लगा सकते हैं कि IAS beat करना कितना मुश्किल काम है , और ऐसे में जो कोई भी इस exam को clear करता है उसके लिए अपने आप ही मन में एक अलग image बन जाती है । और जब ऐसा करने वाला किसी बहुत ही साधारण background से हो तो उसके लिए मन में और भी respect आना स्वाभाविक है। ये कहानी है Govind Jaiswal की , गोविन्द के पिता एक रिक्शा -चालक थे , बनारस की तंग गलियों में , एक 12 by 8 के किराए के कमरे में रहने वाला गोविन्द का परिवार बड़ी मुश्किल से अपना गुजरा कर पाता था । ऊपर से ये कमरा ऐसी जगह था जहाँ शोर -गुल की कोई कमी नहीं थी , अगल-बगल मौजूद फक्ट्रियों और जनरेटरों के शोर में एक दूसरे से बात करना भी मुश्किल था। नहाने -धोने से लेकर खाने -पीने तक का सारा काम इसी छोटी सी जगह में Govind, उनके माता -पिता और दो बहने करती थीं । पर ऐसी परिस्थिति में भी गोविन्द ने शुरू से पढाई पर पूरा ध्यान दिया। अपनी पढाई और किताबों का खर्चा निकालने के लिए वो class 8 से ही tuition पढ़ाने लगे । बचपन से एक असैक्षिक माहौल में रहने वाले गोविन्द को पढाई लिखाई करने पर लोगों के ताने सुनने पड़ते थे । “ चाहे तुम जितना पढ़ लो चलाना तो रिक्शा ही है ” पर गोविन्द इन सब के बावजूद पढाई में जुटे रहते । उनका कहना है- मुझे divert करना असंभव था ।अगर कोई मुझे demoralize करता तो मैं अपनी struggling family के बारे में सोचने लगता। आस – पास के शोर से बचने के लिए वो अपने कानो में रुई लगा लेते , और ऐसे वक़्त जब disturbance ज्यादा होती तब Maths लगाते , और जब कुछ शांती होती तो अन्य subjects पढ़ते ।रात में पढाई के लिए अक्सर उन्हें मोमबत्ती, ढेबरी, इत्यादि का सहारा लेना पड़ता क्योंकि उनके इलाके में १२-१४ घंटे बिजली कटौती रहती। चूँकि वो शुरू से school topper रहे थे और Science subjects में काफी तेज थे इसलिए Class 12 के बाद कई लोगों ने उन्हें Engineering करने की सलाह दी ,। उनके मन में भी एक बार यह विचार आया , लेकिन जब पता चला की Application form की fees ही 500 रुपये है तो उन्होंने ये idea drop कर दिया.

  • Official Facebook Page

  • Official Video Gallery

  • Official Picture Gallery