Mr. Sonu Sharma is the founder of DYNAMIC INDIA GROUP (INDIA). An Author, Educator, Business Consultant and a successful Entrepreneur, he is a much sought-after speaker.

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जुनून

आठ साल की उम्र में, उस छोटे से बच्चे को लगा की उच्च विद्यालय का डिप्लोमा ले लेना अच्छा रहेगा| 12 साल का जब वह था, वह अपने परिवार के साथ समुद्र किनारे बैठा मछली पकड़ने की तैयारी कर रहा था – वो रस्सियों का एक जाल बिछा रहा था जिससे बहुत सारी मछलियाँ हुक में फँस जाएँ| शाम तक, उसकी मछली पकड़ने की रस्सी में पूरे परिवार से ज़्यादा मछलियाँ थीं| 17 का जब वह था, उसे अखबार के सब्सक्रिप्शन बेचने की नौकरी मिली| उसे लगा नवविवाहित जोड़े इस काम के लिए सबसे उपयुक्त रहेंगे| उसने अपने दोस्तों को इस काम पर रखा की वे उसे उन दंपत्तियों के नाम और पते लाकर दें जिन्हें हाल ही में शादीशुदा होने का लाइसेंस मिला हो| उसने उन सब को 2 हफ़्तों का सब्सक्रिप्शन मुफ्त देते हुए पत्र लिखे| उसने इससे $18000 कमाए और एक महंगी बी एम् डब्ल्यू कार खरीदी| 19 साल की उम्र में, उसने कंप्यूटर खरीदना शुरू किया और उन्हें बेहतर बनाने लगा| उसने ग्राहकों की ज़रुरतानुसार कंप्यूटर बनाये और अपने कमरे को ही फैक्ट्री बना कर वहाँ से उन्हें बेचने लगा| वह कॉलेज में था मगर पढाई में उसका मन नहीं लगता था| उसे कंप्यूटर बेचने का जुनून था| “आखिर तुम करना क्या चाहते हो?” उसके पिताजी ने पूछा| “आई बी एम् से मुकाबला” उसने सीधा सा जवाब दे दिया| उसके जुनून का नतीजा निकला मई 3, 1984 को डेल कंप्यूटर कारपोरेशन के रूप में| वह मात्र 19 साल का था| यह आदमी था माइकल डेल, एक जुनूनी रचनात्मक व्यापारी होने की अनूठी मिसाल|

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जुड़ते पुल

एक बार दो भाई जो पास-पास दो खेतों में रहते थे, में झगड़ा हो गया| पिछले 40 सालों से बिना किसी अनबन के पास-पास खेती करते हुए, मशीनें साझा करते हुए, मज़दूर बाँटते और प्यार से रहते हुए, ये पहली बार था की इतना झगड़ा हो गया था| और सालों का रिश्ता बिखर गया| बात एक ज़रा सी ग़लतफहमी से शुरू हुई और इतनी बड़ी हो गई की दोनों ने एक दुसरे को बहुत भला-बुरा कहा और हफ़्तों तक बात नहीं की| एक दिन जॉन के दरवाज़े पर एक दस्तक हुई| उसने दरवाज़ा खोला तो सामने बढई का सामान लिए एक आदमी खड़ा था| उसने कहा, “मैं कुछ दिनों के लिए काम ढूंढ रहा हूँ|” “शायद आपके पास मेरे करने लायक कोई छोटा-मोटा काम हो| क्या मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूँ?” “हाँ,” बड़े भाई ने कहा| “काम तो है तुम्हारे लिए| नाले के उस पार वो खेत देखो| वो मेरा पड़ोसी है, बल्कि, मेरा छोटा भाई है| पिछले हफ्ते तक हम दोनों के बीच में एक चारागाह था पर इसने अपना बुलडोज़र लेकर नदी से यहाँ तक हम दोनों के बीच में ये नाला बना दिया| उसने ये मुझे चिढ़ाने के लिए किया होगा, मगर अब मैं इसे बताऊंगा| वहाँ कोठर में पड़ी लकड़ी देख रहे हो? मैं चाहता हूँ तुम मुझे एक बाड़—8 इंच ऊंची बाड़ बना के दे दो—ताकि मुझे उसकी जगह देखनी ही नहीं पड़े| कुछ भी, जिससे वो शांत हो जाए|” बढ़ई ने कहा, “लगता है मैं माजरा समझ रहा हूँ| मुझे कीलें और जगह बताएं जहाँ बाड़ लगानी है और मैं आपकी पसंद का काम कर के दे दूंगा|” बड़े भाई को कुछ सामान लाने के लिए बाज़ार जाना था तो उसने बढई को उसकी ज़रूरत का सामान दिया और दिन भर के लिए निकल गया| बढई ने दिनभर मेहनत से नाप कर, लकड़ी चीर कर, कीलें लगा कर काम किया| शाम ढले जब किसान वापस लौटा, तब बढ़ई ने बस अपना काम खत्म किया ही था| उसकी आँखें खुली की खुली रह गईं और उसका मुंह खुला का खुला| वहाँ कोई बाड़ नहीं थी| वहाँ एक पुल था... नाले के इस पार से उस पार तक! काम बहुत सुन्दर था, हत्थे वगेरह के साथ- और उसका पड़ोसी, उसका छोटा भाई, उस पार से बाहें फैलाये उसके पास आ रहा था| “तुम भी कमाल के हो| इतना सब मेरे कहने सुनाने के बाद भी तुमने ये पुल बनवा दिया|” दोनों भाई पुल के दोनों किनारों से चल के पुल के बीच में मिले और एक दूसरे के हाथ थाम लिए| पलट के देखा तो बढ़ई अपने कन्धों पर अपना सामान ले कर निकल रहा था| “नहीं, रुको! कुछ दिन और रुक जाओ| तुम्हारे लिए मेरे पास और काम है,” बड़े भाई ने कहा| “मैं ख़ुशी से रुकना चाहता,” बढई ने कहा, “मगर अभी मुझे और कई पुल बनाने हैं|”

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ज़िम्मेदारियाँ

एक बार जो. ई. ब्राउन, नामी अभिनेता व हास्य-अभिनेता सैनिकों के एक बड़े ग्रुप को संबोधित कर रहे थे| जब भी वह ख़त्म करना चाहते, सैनिक शोर मचा कर उन्हें कार्यकर्म बढ़ाने को कहते| फिर एक ने कहा “जो, कुछ गन्दी कहानियाँ सुनाओ”| सन्नाटा इतना गहरा छाया की सुई गिरने की आवाज़ भी सुनाई दे जाती| सब लड़के जो को देख रहे थे| जो एक मिनट रुके और फिर ये भूल कर की वह यहाँ लोगों का मनोरंजन करने के लिए हैं, उनसे अपने बेटों की तरह बोले: “सुनो, बच्चों| मैं दस साल का था जब से स्टेज पर हूँ| मैंने हर तरह के लोगों को हर तरह के जोक सुनाए हैं मगर मुझे गर्व है कि इस पूरे समय में मुझे लोगों को हंसाने के लिए कभी गंदे जोक नहीं सुनाने पड़े| मुझे भी कुछ गन्दी कहानियाँ पता हैं, बच्चों; मैंने अपनी ज़िन्दगी में ऐसी बहुत सी कहानियाँ सुनी हैं| मगर मैंने शुरू से एक नियम बना रखा है कि मैं ऐसी कोई कहानी नहीं सुनाऊंगा जो मैं नहीं चाहता की मेरी माँ मुझे सुनाते हुए सुने|” उनका ये वाक्य ख़त्म होने पर तालियों की इतनी बड़ी गडगडाहट गूंजी जैसी उन्होंने पहले कभी नहीं सुनी थी| कई मिनटों तक वे लोग चिल्लाते और तालियाँ बजाते रहे, इनमे वह लड़का भी था जिसने गन्दी कहानी सुनाने की फ़रमाइश की थी| मगर किस्सा यहीं खत्म नहीं हुआ| लड़कों ने यह बात अपने घर लिख कर अपने अभिभावकों को बताई, और उन्होंने अपना शुक्रिया अदा करते हुए जो को लिखा| किसी ने लिखा: “आपने जो मेरे बेटे के लिए किया उसके लिए मैं हर रात प्रार्थना करुँगी|”

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खुश रहिये

हम सब जानते हैं कि पैसे से ख़ुशी नहीं खरीदी जा सकती...मगर अक्सर हम ऐसे बर्ताव करते हैं कि अगर हमारे पास थोडा और पैसा होता तो हम ज्यादा खुश होते| अमीर बनने की चाह हमारे अन्दर पैदा की जाती है (जबकि हम जानते हैं कि अमीर भी खुश नहीं हैं)... हमे ट्रेन किया जाता है उस आधुनिक गैजेट को पाने की चाह रखने के लिए या टीवी पर दिखाए उस नए स्टाइल को अपनाने के लिए... हम ज्यादा कमाना चाहते हैं ताकि हम एक बेहतर ज़िन्दगी जी सकें| मगर इस सब से हमे ख़ुशी नहीं मिल सकती| चाहे हम जितना कमा लें| चाहे हमारे बैंक में कितने ही पैसे आ जाएँ| चाहे हमारे कपड़े, कार या खिलौने कितने ही अच्छे हो जाएँ, ये सब हमे ख़ुशी नहीं दे सकते| मगर दुखद है कि इस बात की समझ आने से पहले हम कई दशक पैसा और शान-ओ-शौकत कमाने में लगा चुके होंगे| तो हमे ख़ुशी कैसे मिलेगी? किस्मत अच्छी है कि इसके लिए जिन तीन चीज़ों की ज़रूरत है उनमे कोई खर्चा नहीं है| रिसर्च के अनुसार ये तीन चीज़ें स्थापित हुई हैं – सैंकड़ों लोगों से पूछने के बाद की उनके पास क्या है, उनकी जिंदगियां कैसी हैं, और वो कितने खुश हैं| तो ये हैं, “खुश रहने के तीन राज़”: • अच्छे रिश्ते: इंसानी तौर पर दूसरों के पास रहना हम सब की ज़रूरत है, नज़दीकी, दुसरे इंसानों से| अच्छे, मददगार दोस्त, एक सशक्त शादी और अपने घरवालों के साथ करीबी, प्यारभरे सम्बन्ध हमे खुश रहने के ज़्यादा करीब लाते हैं| कदम बढ़ाएं: आज ही, वक्त निकालें, अपनों के साथ बिताने के लिए, उन्हें बताने के लिए की वे आपके लिए क्या हैं, उनकी सुनने के लिए, और उनके साथ अपना रिश्ता मज़बूत करने के लिए| सकारात्मक सोच: मैं निश्चित ही सकारात्मक सोच का अपने लक्ष्य को पाने का बेहतरीन तरीका मानने का बड़ा प्रवक्ता हूँ, मगर यह ख़ुशी पाने का भी एक बेहतरीन तरीका है| आशावाद और आत्मसम्मान खुश रहने वाले लोगों के सबसे बड़े सूचक हैं| ख़ुश लोग सशक्त और अपनी ज़िन्दगी की भागदौड़ बेहतर संभाले हुए होते हैं और ज़िन्दगी की ओर उनका एक आशावादी दृष्टिकोण होता है| कदम बढ़ाएं: सकारात्मक सोच को आदत बनाएं| बल्कि इसे अपनी सबसे पहली आदत बनाएं| हर बुरे ख्याल को दबा कर उसे अच्छे ख्याल से बदल देने की आदत डालें| “मुझसे नहीं होगा” की जगह “मुझसे होगा” सोचें| सुनने में यह शायद थोड़ा बड़बोला लगे, मगर मेरे लिए यह हर बार काम करता है| बहाव: यह आजकल इंटरनेट पर एक चलन है – वह स्थिति जिसमे हम प्रवेश करते हैं जब हम किसी काम में पूरी तरह से डूबे होते हैं| हम अपने काम में इतना डूबे होते हैं की हमे समय का पता ही नहीं चलता| काम या आराम जो भी हमे इस बहाव की स्थिति में ले आए, हमे निश्चित ही ख़ुशी देगा| लोगों को तब सबसे ज्यादा ख़ुशी नहीं मिलती जब वे खाली दिमाग होते हैं, बल्कि तब होती है जब उनके पास दिमाग लगाने लायक कोई चुनौती होती है| कदम बढ़ाएं: ऐसे काम ढूंढें जिनके लिए आपमें जोश हो| यह सबसे ज़रूरी कदम है| ऐसे शौक ढूंढें जिनके लिए आपके मन में उत्साह हो| टीवी बंद करें – या बहाव के उलटे जाना है – बाहर निकलें और कुछ ऐसा करें जिसमे आप सचमुच हिस्सेदार हों| आपको खुश रहने के तीन राज़ बताये गए हैं| इन्हें ज़ाया ना करें! इनका अनुसरण करें और प्रेरित रहें...

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